गुरुवार, 29 अगस्त 2019

लघु कथा-३ : नया चक्रब्यूह


रमसू के हाथों लिफाका पकड़ाते हए कंपनी के आखिरी पायदान पर खड़े कर्मचारी उमेरु  ने कहा
लीजिये साहब | लगता है अब कम्पनी में आपका समय पूरा हो चुका है | पिछले दस दिन से ऐसे ही लिफ़ाफ़े सौंपने के जुर्म में कई लोगों की बद-दुआएं ले चुका हूँ | आपने भी जो कहना है कह दीजिये | मैं हूँ चौकीदार | गेट पर खड़े रहने के साथ-साथ चपरासी का काम कर रहा हूँ | मेरा क्या ? आज इस गेट पर कल दूसरे गेट पर चला जाऊँगा | ठेकेदार का आदमी जो ठहरा |

ठीक है तुम जाओ | तुम कम से कम किसी के आदमी तो हो | हम तो लगता है किसी के  नहीं |

कहते-कहते रमसू ने एक सांस में मनहूस पत्र को दो-तीन बार पढ़ लिया | चौकीदार की आशंका गलत न थी लेकिन उसे कोशने का मन नहीं हुआ | किसी तरह कुरसी के हत्थों का सहारा लेकर उन्हें जोर से भींच लिया और आँखे मूँद ली | आस-पास बैठे सहकर्मियों में किसी की हिम्मत न हुई कि जाकर रमसू को ढांडस बंधाये | इसी डर से कहीं एसा करने से उनको भी लिफाफा न आ जाये |

बाकी नौकरियों को ताक पर रख इस नौकरी को पाने के लिए कितनी मेहनत की थी उसने | एक जूनून था टेलेंट के मुताबिक जॉब पाने और उसे इम्लिमेंट करने का | अच्छी नौकरी होने के कारण शादी भी जल्दी हो गयी | पांच वर्षों में गाड़ी और फ्लैट भी फाइनेंस करा लिया | अब क्या होगा ? कैसे चलेगा घर ? कैसे अदा होंगी बैंक की किश्ते ? बाप-दादा भी तो कोई जमीन-जायदाद छोड़ कर नहीं गए | बैंक तो पुराने ज़माने के साहूकारों के बाप हैं | नौकरी जाने के बाद अपने मित्र हर्षि की कहानी उसे अपने इर्द-गिर्द घूमती नजर आने लगी | चाहने पर भी वह खुद उसकी मदद न कर सका | न जाने कितनी जगह उसका रिज्यूमे दिया |

पिछले ढाई बर्ष से बेचारा महाभारत के अभिमन्यु की तरह परिवार, बैंक और कोर्ट के चक्रब्यूह में फंसा है | बाबजूद क्वालिफाइड होने के उसके लिए मानों सारी कंपनियों के दरवाजे बंद हैं | परिवार,नाते-रिश्तेदार,बैंक,कोर्ट-कचहरी,जेल रूपी नए चक्रब्यूह की कल्पना मात्र से उसका शरीर कांपने लगा | कुरसी-टेबल के हिलने की आवाज सुनकर चौकीदार दौड़ा आया और रमसू को झकझोरा |

क्या हुआ साहब .... क्या हुआ आपको .... |
जैसे एक लम्बी तंद्रा से जागकर रमसू की बिस्मृत सी आँखों ने उमेरु की तरफ देखा और सिर झुका लिया |

साहब काफी देर हो चुकी है, सारे लोग घर जा चुके हैं | केवल बड़े साहब बैठे हैं | मैं उनसे रिक्वेस्ट करके आपको घर छुड़वाने का इंतजाम करवाता हूँ अभी | सब ठीक हो जाएगा साहब ...हिम्मत रखो ....खुद को संभालो .... भगवान् सब ठीक कर देगा |
 @८/२०१९ विजय कुमार मधुर 



1 टिप्पणी:

  1. काफी अच्छी लघु कथा है. आज के इस दौर में ज्यादतर युवतियों या युवको को इस तरह की परिस्थितियों से सामना करना पड़ रहा है.

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